कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम:कन्नौजी लोकरंग

कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम कन्नौजी लोकरंग दिनांक 1मार्च 2026 को कन्नौज के सेंट जेवियर्स कॉलेज में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कन्नौज के कवि,लेखक और साहित्यकार प्रो रमेश तिवारी विराम की स्मृति में पवित्र परिवार जनसेवा समिति द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डा राम बहादुर मिसिर,श्री अशोक बैनर्जी,डा बीरेंद्र कुमार चंद्रसखी,डा… कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम:कन्नौजी लोकरंग पढ़ना जारी रखें

 “कनउजी हइ हमाई मात- भाखा ,कनउजी हइ हमाई शान”

दोहा:  फरुखाबाद को नगरु हइ, दुनियां मइं सरनाम।                                                                                                                                                                                                                                                             नगर कनउज को जानिए सुन्दर हइ जाको नाम।चौबोला:- सुन्दर हइ जाको नाम,जहां गट्टा सी मिठास आई।                 छींट कनउजी जग जाहिर हइ,अतर महक सुखदाई।                  लोग मेहन्ती अउर  मिलनुआं,कनउज बामन भाई।                   कान्यकुब्ज हतो नांव जो हमइं इतिहास रहो बतलाई।दौड़:- वैदिक काल की नगरी, पौराणिक समय की अगरी।                                     तीन संघरस…  “कनउजी हइ हमाई मात- भाखा ,कनउजी हइ हमाई शान” पढ़ना जारी रखें

कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु

जा सबन्न लोगनु कउं नांइ  मालुम हुइहइ के अपएं देस मां तबला बजा इसे के कित्ते घराने हइं, उहीं पूरबी बाज को घरानों अपओं  फर्रुखाबाद उ हइ। जा घराने की कहानिउ बड़ी चटक- मटक अउ जीभ- चटाके बाली हइ। तउ आबउ जा  कहानिउ कउं सुनइं अउ जा कहानियां हमइं सी ए बाइली  C A Baily. … कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु पढ़ना जारी रखें

कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर

१ हाथरस क्षेत्र की नौटंकी में खड़ी बोली के साथ उर्दू ( अरबी- फारसी) के शब्दों का आधिक्य है। कनउजी क्षेत्र की भाष कनउजी,उर्दू , ब्रजभाषा का मिश्रण है।इसमें कनउजी के लोकगीत( दादरे, विरह गीत,संस्कार गीत) आदि का मिश्रण होता है। वास्तविकता यह है कि कनउजी नौटंकी की भाषा बाजारू हहोती है।। २- हाथरस क्षेत्र… कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर पढ़ना जारी रखें

 कनउजी लोक साहित्य और संगीत शास्त्र एक अनुशीलन

लोक साहित्य में आने वाली विधा इसके लोकगीत हैं,ये लोकगीत स्वस्फूर्त और स्वतंत्र रूप से गेय होते हैं,उन लोक गीतों की लय,धुन परम्परागत रूप से निश्चित होती है।लोकगीतों में (रंगतें, रागों के सुर,रागांश) प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। ये सुनने में बहुत कर्णप्रियता लिए हुए होते हैं। कनउजी क्षेत्र में ऐसी बहुत सी रंगतें…  कनउजी लोक साहित्य और संगीत शास्त्र एक अनुशीलन पढ़ना जारी रखें

कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना

दोहा:-  कानपुर के पास में नगर बिठूर सरनाम। नाना जी के महल में,  था मैंना सुन्दर नाम।।चौबोला:- मैना सुन्दर नाम,नाना जी की बेटी प्यारी।थी वह गुणों की खान लगे मैना की सूरत न्यारी।ओजस्विता से दीप्त मुखड़ा देश प्रेम चिनगारी।ग्यारह सरस की कन्या सुकोमल थी मैना सुकुमारी।दौड़:- नाना की बेटी जानो।हृदय की धड़कन मानो। लगे हैं… कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना पढ़ना जारी रखें

कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना

दोहा:- कानपुर के पास में नगर बिठूर सरनाम। नाना जी के महल में, था मैंना सुन्दर नाम।। चौबोला:- मैना सुन्दर नाम,नाना जी की बेटी प्यारी।थी वह गुणों की खान लगे मैना की सूरत न्यारी। ओजस्विता से दीप्त मुखड़ा देश प्रेम चिनगारी।ग्यारह सरस की कन्या सुकोमल थी मैना सुकुमारी। दौड़:- नाना की बेटी जानो।हृदय की धड़कन… कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना पढ़ना जारी रखें

 कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर

सांगीत( नौटंकी) चाहे ब्रज की हो या कनउजी की हो उनमें शैलीगत अन्तर अधोलिखित पाएंगे। १ हाथरस क्षेत्र की नौटंकी में खड़ी बोली के साथ उर्दू ( अरबी- फारसी) के शब्दों का आधिक्य है। कनउजी क्षेत्र की भाष कनउजी,उर्दू , ब्रजभाषा का मिश्रण है।इसमें कनउजी के लोकगीत( दादरे, विरह गीत,संस्कार गीत) आदि का मिश्रण होता…  कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर पढ़ना जारी रखें

 कनउजी क्षेत्र में सांगीत (नौटंकी) का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

उत्तर भारतीय लोकनाट्यों में सांगीत (नौटंकी) एक ऐसा लोकनाट्य है जिसमें कलाकारों के द्वारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन करके श्रोताओं दर्शकों को मनचाहे मन:स्थिति में लाया जा सकता है। संगीत में कुछ ऐसे समाज और समाज के लोग प्रदर्शन करते थे जो परंपरागत लोकनाट्यो से जुड़े होते थे इससे पूर्व उनकी परंपरा संगीत की पृष्ठभूमि की थी…  कनउजी क्षेत्र में सांगीत (नौटंकी) का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पढ़ना जारी रखें

कनउजी लोक साहित्य एवं भाषा विज्ञान एक विश्लेषण

किसी भी लोक साहित्य की जाती क्षेत्र की विभिन्न बोलियों में होती है। क्षेत्रीय लोक साहित्य परिवर्द्धन और‌ परिवर्तन के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग करते करते चलता रहता है।कनउजी लोक साहित्य भी इस प्रक्रिया से अछूता नहीं है।यदि हमें विभिन्न कालों के कनउजी लोक साहित्य संग्रहीत उपलब्ध हो जाएं तो हम तुलनात्मक अध्ययन के… कनउजी लोक साहित्य एवं भाषा विज्ञान एक विश्लेषण पढ़ना जारी रखें