घाघ की कहावतैं(किसनई संबंधी)

माटी अउर जोत की गुर्र जेतो गहिरो जोतै खेत,तिनके रहाय न घास को रेत। सौ कै जोत, पचास की खेती। बुइबे को समओ धान ,पान अरु ओला, तीनऊं पानी के गोला। (धान पान अरु केरा, जे तीनहुं पानी के चेरा) चना बोलै कि बागा(बाधा) मार।चना कौं छितराय कैं बुयबो चहियैं गेहूँ बाहे, चना दलाये। मौसम… घाघ की कहावतैं(किसनई संबंधी) पढ़ना जारी रखें

कन्नौजी की सामयिकता : शैक्षिक संदर्भ

वक्ता :डा. रश्मि शील(साहित्यकार, लखनऊ)डा. अजय कुमार प्रजापति(युवा अध्येता) सरस्वती वंदना : श्रीमती सुमन पाठकस्वागत वक्तव्य : डा. प्रखर दीक्षितअतिथियों का परिचय:डा. अपूर्वा अवस्थीविषय प्रवर्तन:डा. बीरेंद्र कुमार चंद्रसखीधन्यवाद ज्ञापन:डा महेश मधुकरसंचालन: पारस सैनी दिनांक : 28 अप्रैल 2026समय : सायं 07 बजेआप सभी सादर आमंत्रित है। जुड़ने का लिंकTo join the meeting on Google Meet,… कन्नौजी की सामयिकता : शैक्षिक संदर्भ पढ़ना जारी रखें

कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम:कन्नौजी लोकरंग

कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम कन्नौजी लोकरंग दिनांक 1मार्च 2026 को कन्नौज के सेंट जेवियर्स कॉलेज में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कन्नौज के कवि,लेखक और साहित्यकार प्रो रमेश तिवारी विराम की स्मृति में पवित्र परिवार जनसेवा समिति द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डा राम बहादुर मिसिर,श्री अशोक बैनर्जी,डा बीरेंद्र कुमार चंद्रसखी,डा… कन्नौजी बोली के लिए एक विशेष कार्यक्रम:कन्नौजी लोकरंग पढ़ना जारी रखें

 “कनउजी हइ हमाई मात- भाखा ,कनउजी हइ हमाई शान”

दोहा:  फरुखाबाद को नगरु हइ, दुनियां मइं सरनाम।                                                                                                                                                                                                                                                             नगर कनउज को जानिए सुन्दर हइ जाको नाम।चौबोला:- सुन्दर हइ जाको नाम,जहां गट्टा सी मिठास आई।                 छींट कनउजी जग जाहिर हइ,अतर महक सुखदाई।                  लोग मेहन्ती अउर  मिलनुआं,कनउज बामन भाई।                   कान्यकुब्ज हतो नांव जो हमइं इतिहास रहो बतलाई।दौड़:- वैदिक काल की नगरी, पौराणिक समय की अगरी।                                     तीन संघरस…  “कनउजी हइ हमाई मात- भाखा ,कनउजी हइ हमाई शान” पढ़ना जारी रखें

कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु

जा सबन्न लोगनु कउं नांइ  मालुम हुइहइ के अपएं देस मां तबला बजा इसे के कित्ते घराने हइं, उहीं पूरबी बाज को घरानों अपओं  फर्रुखाबाद उ हइ। जा घराने की कहानिउ बड़ी चटक- मटक अउ जीभ- चटाके बाली हइ। तउ आबउ जा  कहानिउ कउं सुनइं अउ जा कहानियां हमइं सी ए बाइली  C A Baily. … कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु पढ़ना जारी रखें

कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर

१ हाथरस क्षेत्र की नौटंकी में खड़ी बोली के साथ उर्दू ( अरबी- फारसी) के शब्दों का आधिक्य है। कनउजी क्षेत्र की भाष कनउजी,उर्दू , ब्रजभाषा का मिश्रण है।इसमें कनउजी के लोकगीत( दादरे, विरह गीत,संस्कार गीत) आदि का मिश्रण होता है। वास्तविकता यह है कि कनउजी नौटंकी की भाषा बाजारू हहोती है।। २- हाथरस क्षेत्र… कनउजी सांगीत(नौटंकी) में शैलीगत अन्तर पढ़ना जारी रखें

 कनउजी लोक साहित्य और संगीत शास्त्र एक अनुशीलन

लोक साहित्य में आने वाली विधा इसके लोकगीत हैं,ये लोकगीत स्वस्फूर्त और स्वतंत्र रूप से गेय होते हैं,उन लोक गीतों की लय,धुन परम्परागत रूप से निश्चित होती है।लोकगीतों में (रंगतें, रागों के सुर,रागांश) प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। ये सुनने में बहुत कर्णप्रियता लिए हुए होते हैं। कनउजी क्षेत्र में ऐसी बहुत सी रंगतें…  कनउजी लोक साहित्य और संगीत शास्त्र एक अनुशीलन पढ़ना जारी रखें

कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना

दोहा:-  कानपुर के पास में नगर बिठूर सरनाम। नाना जी के महल में,  था मैंना सुन्दर नाम।।चौबोला:- मैना सुन्दर नाम,नाना जी की बेटी प्यारी।थी वह गुणों की खान लगे मैना की सूरत न्यारी।ओजस्विता से दीप्त मुखड़ा देश प्रेम चिनगारी।ग्यारह सरस की कन्या सुकोमल थी मैना सुकुमारी।दौड़:- नाना की बेटी जानो।हृदय की धड़कन मानो। लगे हैं… कानपुरी सांगीत के तीन छन्दों का नमूना पढ़ना जारी रखें

कनउजी लोक साहित्य और मनोविज्ञान- एक विश्लेषण:-

मनोविज्ञान के अध्येताओं ने मानवीय मनस् का अध्ययन करते करते यह पाया कि लोक साहित्य में ऐसे बहुत सारे तथ्य हैं जिनसे मानवीय मन को समझने में उतनी ही मदद मिलती है,जितनी स्वप्न के द्वारा फ्रायड,जुंग, जीन पियाजे को मिली,फ्रायड ,जुंग ने तो लोक साहित्य की मानव मन को समझने में भरपूर मदद ली और… कनउजी लोक साहित्य और मनोविज्ञान- एक विश्लेषण:- पढ़ना जारी रखें

कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु:-

जा सबन्न लोगनु कउं नांइ  मालुम हुइहइ के अपएं देस मां तबला बजाइबे के कित्ते घराने हइं, उहीं पूरबी बाज को घरानों अपओं  फर्रुखाबाद उ हइ। जा घराने की कहानिउ बड़ी चटक- मटक अउ जीभ- चटाके बाली हइ। तउ आबउ जा  कहानिउ कउं सुनइं अउ जा कहानियां हमइं सी ए बाइली  C A Baily.  सुनान… कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु:- पढ़ना जारी रखें