कनउजी तबला बजाइबे को घरानों फर्रुखाबाद अउर आजु

जा सबन्न लोगनु कउं नांइ  मालुम हुइहइ के अपएं देस मां तबला बजा इसे के कित्ते घराने हइं, उहीं पूरबी बाज को घरानों अपओं  फर्रुखाबाद उ हइ। जा घराने की कहानिउ बड़ी चटक- मटक अउ जीभ- चटाके बाली हइ। तउ आबउ जा  कहानिउ कउं सुनइं अउ जा कहानियां हमइं सी ए बाइली  C A Baily.  सुनान जाइ रये हइं।
” जा बात बा दउर की हइ जब फर्रुखाबाद मइं नबाबन को दउर हतो, फर्रुखाबाद के नबाब के बुलन्द महल मइं संगीत की महिफिलइं अउर नाच- गाना चल्तुइ रहत हतो।जा घराने की शुरुआति बस्सि हियना सइ होति हइ। जा बात सन् १७७९-१८२६ के बीच की हइ  कइ सहिर के चीनी गांव के रहिबे बारे उस्ताद हाजी बिलायत  खां अउर उनके चाचा सालारी  खान  लखनऊ के उस्ताद  बख्शू खान के चेला हते,होत- कत्त  की बात आजु बुलन्द महल मइं संगीत की महिफिल सजी भई हती। बा महिफिल मइं बहुतइ माने भए उस्ताद डटे  हते।फिर का भओ कइ सालार खान नें लखनऊ के बख्शू खान कउं ललकारो कइ ,लेकिन का भओ कइ बख्शू  खान नइं अपएं चेला हाजी बिलायत खान सइ जा ललकार  सुबीकार करिबे के लांइ कहीं कइ बे   हाजी बिलायत खां  के संगइ तबला की भिड़ंति कउं सुबीकार कर्रए हइं। जाइ फौरन ( फउरन) सुबीकार कल्लओ  गओ। भिडन्ति आपुस मइं होन लगी,सबई सुनिबे बारे  मद मइं डूबत जात हते ,तीन दिनां तकि अइसी भिडन्ति चल्ति रई कोई हारिबे को नांउ नाइं  लइ रओ । कोई काउ सइ कमि नांइ  पर्रओ हतो , तबला के बोल- जोड़ बजत चले जाइ रये हते  का भओ  कइ अचानक हाजी बिलायत खान नइं सालारी खान कउं अपईं “बाज” की गत सइ चउंकाइ दओ। जाकउं सालारी खान नइं कबहूं नाइं सुनो हतो। जा मउका को फाइदा उठाइ  कइं  तबला के गट्टा बदलिबो अउर बद्दी कसिबो सुरू कद्दई। जाइ बीच मइं सालार खान नइं एकु परफइक्ट जोडा बनाइ कइं हाजी साहब कउं जबाबु देन लगे।महिफिल मइं सइ वाह!वाह!की अबाजइं आन लगीं,१५ दिनां  तकि जा  भिडन्ति चली। अइसी चली कइ कोई- कोऊ सइ कमि नाइं परइ। सालार खान हाजी बिलायत खान की गत “ठप्पा” को जबाबु नाइं दइ पाए,अउ  हार गए।हाजी बिलायत खां जीति गए।
गत “ठप्पा ” फर्रुखाबाद की असली पहचान बनि गई। जा जीत की इनाम मइं उस्ताद बख़्शू खां नइं अपईं दोनऊं बिटियन को बिआउ हाजी अउर सालार खा के संगइ कद्दओ,अउर ५०० गतें  दहेज मइं दईं,जे आजु तकि  संगीत के संसार मइं दहेज की गतें कहीं जातीं हइं। सबु लोग जासइ फर्रुखाबाद कउं जानन लगे।बादि मइं उस्ताद अहमद जान “थिरकवा” नें बहुतइ  नांम  कमाओ उनके बेटा ऊ बहुत नाम वाले भए।
आजु हम कहि सकत हइं कइ  फर्रुखाबाद काऊ सइ कमि नाइं हइ । जा कनउजी की असली पहिचान हइ।
आबउ सब मिलि कइं  कनउजी कउं ऊंचाई देवइं ।
डाॅ बीरेंद्र कुमार चन्द्रसखी
मयनपुरी उत्तर प्रदेश।
९२०५४६०२६४ 

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