दोहा: फरुखाबाद को नगरु हइ, दुनियां मइं सरनाम।
नगर कनउज को जानिए सुन्दर हइ जाको नाम।
चौबोला:- सुन्दर हइ जाको नाम,जहां गट्टा सी मिठास आई।
छींट कनउजी जग जाहिर हइ,अतर महक सुखदाई।
लोग मेहन्ती अउर मिलनुआं,कनउज बामन भाई।
कान्यकुब्ज हतो नांव जो हमइं इतिहास रहो बतलाई।
दौड़:- वैदिक काल की नगरी, पौराणिक समय की अगरी।
तीन संघरस की नगरी।
कनिष्क ,मौर्य गुप्त ,नाग,मौखरि, प्रतिहार से संवरी।
सवैया:- हर्ष जहां राजा से भए, कवि बाण भए आखर के गयानी।
राजशेखर से वीर भए ,अउ शारद मात नइं गिरा बखानी।
त्रिमोहन, गुलाबो नौटंकी कही, कनउजी सजी जैसे महारानी।
“चन्द्रसखी ” जा कनउजी भली,सजी संवरी बैठी पटरानी
दोहा:- मयनपुरी मेरी मातु की, अन्तर्वेदी शान।
धन्य कनउजी जानिए,बढ़ता इसका मान।
सवैय:- मठा के आलू नीके लगइं,उल्दा की पुरी अति सुआद मइं प्यारी।
कल्हरे आलू जो होइं लला,भुंजिया मंइथी की लीला न्यारी।
हींग को छउंक, लगइ जबहीं, तिल के लडुअन पंगति भारी।
चन्द्रसखी जब ठण्ड लगइ ,तापउ अगिहाने के जाइ अगारी ।
मयनपुरी को खान- पान ,पांति को बइठन उठान, जब ना देखउ तउ जिउ जावइ।
जिउनारें औ गारी, नकटउरो अउ नारी, लाज नांइ विचारी,जे मारि- मारि भाजइ ।
लरिकन की गारी, खेल खेलइं मद्द- नारी,आजु आइ गए बिहारी, जा मन मइं भावइ।
चन्द्रसखी गावइ ,सब कनउजियन रिझावइ, प्रभू के गुन गावइ, तब हरी मन भावइ ।
वीर छन्द:- मयनपुरी के लोगों सुनि लेउ, कनउज भाखा कथा महान।
कनउज सइ जा बनी कनउजी ,कन्नौज नगर की बाढी शान ।
राजशेखर प्राकृत पंचाली ,लिखीं कनउज मइं लीला गाय।
पांचाल प्रदेश की भाखा जानउ, द्रुपद नरेश कम्पिल के राय।
आजु कनउजी कहां पइ पहुंची,बैठिकें सबरे करउ बिचार।
बोलउ- चालउ सबरे कनउजी, पढउ- लिखउ होवहु हुसियार।
हियां की बातइं हियां पइ छोडउ, अपने बांधि लेउ हथियार।
चन्द्रसखी हथियार लेखनी, करियो जाको बेड़ा पार।
डाॅ बीरेन्द्र कुमार चन्द्रसखी
