कन्नौजी नौटंकी के महारथी कलाकार त्रिमोहन उस्ताद

महाकवि वाणभट्ट औ हर्ष, लोक कवि घाघ की करम भूमि कन उज में एक नौटंकी के कलाकार त्रि मोहन हते. जिन्हें तिरमोहन उस्ताद के नाम से जानो जात हतो. उनको जनम एक कुर्मी परिवार में भौ हतो बे गैवे बजैवे और नचिवे तीनों में उस्ताद हते. बादि में चौथी कला अभिनय भी जुड़ि गयी. शिक्षा तौ उनकी कम हती लेकिन कला उन्हें ईश्वर की देन हती. बे जब नन्हे बालक हते तबहि से दुई लकड़ियाँ लैके खाली पीपा बजाउत हते, गाँव की गाय भैंस चरावैं और बैठि के पीपा बजाउत रहें. जब सयाने भये तौ रियाज करत करत महारत आई गयी. बे नथाराम नौटंकी में आई गए. घुंघरू पांव में बांधि के ऐसो नाचै कि कोई जान ना पावै, नगडि़या ऐसी बजावैं कि लोग सुनतहि रहि जाएं. धीरे धीरे उनकी ख्याति दूर दूर तक फैलि गयी. नथाराम की नौटंकी में रहि के उन्नै सारे गुन सीख लै औ पंडित मन्नी लाल को साथ लैके तिरमोहन मन्नी लाल नौटंकी की थापना कर दयी. नौटंकी पारसी नाट्य शैली से विकसित भयी. मथुरा कन्नौज और कानपुर में नौटंकी के तीन मुख्य स्थान बने. मंधना के नंबरदार और कनौज के तिरमोहन उस्ताद की नौटंकी पूरे उत्तर भारत में ऐतिहासिक सफल भयी. तिरमोहन की नौटंकी की जा विशेषता हती कि बे नगाड़ा बहुत ही बढिया बजाउत हते. और सभै लोग नगाड़ा दुई चोब से बजावैं लेकिन तिरमोहन छ चौब से नगाड़ा बजाउत हते. उनके चार चोब हवा में उड़ैं और दुइ पकरि के नगाड़ा बजावैं औ कबहूँ ताल ना टूटे सो जौ दिखवे के लै दूर दूर ते लोग आवैं. लोग उनकी कला देखि के उन पै रुपिया लुटावैं मेहरियां छज्जों पे खड़ी हुई के अपने जेवर फेंक दें रात रात भर लोग नौटंकी देखें. तिरमोहन के कद काठी के बारे में एक दांय पंडित शिवनाथ मिश्रा जी बताउत हते कि बे साढे सात फिट लंबे गेहुंआ बदन सुंदर शरीर वाले हते. गोल दुपल्ली टोपी सर पे लगाउत हते लंबो रेशमी कुरता पहिरत हते इत्र के शौकीन हते पान खात हते. कनौज की फूल मती देवी के भक्त हते फूल मती मातेसुरी सकल संवारो काज सभा भवन में हम जुटे, मातु बचावो लाज इस वंदना के बाद उनकी नौटंकी शुरू होत हती. तिरमोहन ने राजा हरिश्चन्द्र, मलखान समर, लैला मजनू, शीरी फरहाद, हकीकत राम, खुदा दोस्त सुल्तान , बंदा बैरागी जैसी नौटंकी खेली. तिरमोहन उस्ताद ने सबसे पहिले गुलाब बाई को नौटंकी के मंच पर लाए.उसके बाद गुलाब बाई को कन्नौजी लोक गायिका को सम्मान मिलो. नदी नारे ना जाओ श्याम पैंया परुं जे उनकी बहुत ही मसहूर दादरा हतो. तिर मोहन उस्ताद ने कृष्णा बाई, सो नकली, अन्नो और निरी महिला कलाकारन कौ मंच पे उतारो. उनकी मंडली में राजा हरिश्चन्द्र, सुल्ताना डाकू, मलिहर अहमद, और नकटा जैसे महत्वपूर्ण पुरुष कलाकार हते.जब तिर मोहन नाचत हते तौ बे झूम झूम के गावैं पतीली चूल्हे पे हो जा सवार चाउर मांगे, चीनी मांगी लै आऐ दूध उधार उनको जौ गीत बहुत बढिया हतो अलबेली मेहरिया पाले परी लरिका घर में, बिटिया घर में कुठिला लैके खिलाउन चली अलबेली मेहरिया पाले परी तिर मोहन उस्ताद ने नौटंकी जैसी विधा को बहुत अच्छे कलाकारों से ऊंचाई पर ले गए. बाद मै नौटंकी में फूहड़ता आई गयी. तिर मोहन के देहावसान के बाद नौटंकी की मंडली बिखर गयी लेकिन आज़हु कन्नौज में तिर मोहन उस्ताद की नौटंकी याद करी जात है.

-डा अपूर्वा अवस्थी

3 टिप्पणियाँ

  1. बहुतइ सुन्दर अउर अच्छो लेखु हइ,तिरमोहन उस्ताद को कोऊअ सानी नाइं हइ। जय होइ फूलमती मइया।

  2. कनउजी इलाका मइं कानपुरी ( कनपुरिया) नौटंकी को बीजु कनउज सइ ई गओ,जामइ उस्ताद तिरमोहन सिंह,पद्मश्री गुलाब बाई नइं कानपुर मइं नौटंकी को घराने बनाओ,इन सबन्न की जर( जड) मइं ब्रज साँगीत के उस्ताद औ शुरुआत करिवे वारे पं नत्था शर्मा गौड हते,वे अपईं साँगीत कम्पनी कानपुर लइ गये अउर हुआं उन्नइं बहुतेरे साँगीत खेल खेले।जाको असरु हुअनां के श्रीकृष्ण पहलवान पइ परो सो देखा- देखी उन्नेउ अपईं कम्पनी बनाइ लगी,जाके संगइ मन्धना के लम्बरदार( नम्बरदार) नइं अपईं कम्पनी बनाइ कें साँगीत खेल खेलन लगे। फिर ई के बाद गुलाबो नइं अपईं ” दी गुलाब थिएट्रिकल साँगीत कम्पनी बनाई अउ नांव कमाओ।फिर उनइं भारत सरकार नइं पद्मश्री सइ नवाजो। श्रीकृष्ण पहलवान कउं संगीत नाटक अकादमी नइं अपओं पुरस्कार दओ।जाविधि सइ कानपुरी नौटंकी( कनउजी) नौटंकी नइं अपओं झण्डा ऊचो करो अउ आजु तकि हइ,अब नयी पीढी जापइ शोधु कर्फ्यू हइ,जातें बढि कइं अउर का हुइहइ? हम तउ खुस हइं। अउ आप——–?

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